रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड

रूरल इलेक्ट्रीफिकेशन कारपोरेशन लिमिटेड
भारत सरकार का उद्यम
29जून2017
 
 
 
 

विद्युत उत्पादन-परम्परागत

आरईसी द्वारा विद्युत उत्पादन परियोजनाओं का वित्तपोषण

  • मई, 2002 तक, आरईसी केवल 25 मेगावाट तक क्षमता वाली मिनि/माइक्रो विद्युत उत्पादन परियोजनाओं का वित्तपोषण करता था। जून, 2002 में आरईसी के अधिदेश को सभी विद्युत उत्पादन परियोजनाओं के वित्तपोषण में, भले ही उनका आकार तथा स्थिति कुछ भी हो, शामिल कर विस्तारित किया गया।
  • आरईसी सभी प्रकार की विद्युत उत्पादन परियोजनाओं जैसे ताप, जलविद्युत,नवीकरणीय ऊर्जा, मौजूदा परियोजनाओं के आर एंड एम इत्यादि के लिए वित्तपोषण करता है।
  • आरईसी के उधारकर्ताओं में राज्य क्षेत्र की विद्युत युटिलिटियां/राज्य बिजली बोर्ड/केंद्रीय क्षेत्र, संयुव्त क्षेत्र औतर प्राइवेट क्षेत्र की विद्युत युटिलिटियां शामिल हें।
  • आरईसी एकल उधारकर्ता अथवा सह-उधारकर्ता अथवा कंसोर्टियम में प्रमुख वित्तपोषक के नाते अथवा उसके बिना ऋण स्वीकृत करता है।
  • मौजूदा नीति के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र की उत्पादन परियोजनाओं के लिए ऋण परियोजना लागत के अधिकतम 80 प्रतिशत तक अर्थात 80:20 के ऋण इक्विटी अनुपात में लेकिन विद्युत युटिलिटी के लिए निर्धारित प्रकटन सीमा तक स्वीकृत किया जाता है । प्राइवेट क्षेत्र की परियेजनाओं के लिए, आरईसी द्वारा वित्तपोषण परियेजना लागत के 50 प्रतिशत तक अथवा आरईसी के नेटवर्थ के 25 प्रतिशत तक, जो भी कम हो, सीमित किया जाता है।
  • विद्युत उत्पादन परियोजनाओं के लिए ऋण की अवधि मामला-दर-मामला पर आधारित समुचित ऋण स्थगन अवधि के साथ 10 से 15 वर्ष के बीच है।
  • 2002-03 में शुरुआत के साथ, जब 736 करोड़ रु. के मूल्य की परियोजनाएं स्वीकृत थी, आरईसी ने 2008-09 तक 79772 करोड़ रु के मूल्य की विद्युत उत्पादन परियोजनाएं स्वीकृत की। गत 7 वर्षों के दौरान वित्तीय वर्ष 31.3.09 के अनुसार स्वीकृतियों के ब्यौरे अनुबंध 1 में दिए गए हैं।
  • आरईसी ने डीडीजी परियोजनांओ ंके लिए अलग प्रभाग बनाया है, जो लघु जल विद्युत, बायेमास, पवन ऊर्जा, सोलर और सह-उत्पादन विद्युत परियोजनाओं के लिए ऋण स्वीकृत करता है।
  • आरईसी ने अब तक राज्य क्षेत्र में जो मुख्य परियोजनाएं स्वीकृत की हैं, इनमें पश्चिम बंगाल में संतालदीह टीपीपी, पंजाब में लेहरा मोहब्बत टीपीपी, छत्तीसगढ़ में कोरबा(पूर्वी )और कोरबा (पश्चिमी )टीपीपी, आं प्रदेश में विजयवाड़ा और काकटिया टीपीपी, महाराष्ट्र में भुसवाल और चंद्रापुर टीपीपी, उत्तरांचल में टिहरी एचईपी, गुजरात में उत्तरान टीपीपी, डीवीसी का दुर्गापुर स्टील टीपीपी, जम्मू एवं कश्मीर में बागलीहर एचईपी, उत्तर प्रदेश में अनपरा-डी टीपीपी, तमिलनाडु में वेल्लूर और पूर्वी चेन्नई टीपीपी, राजस्थान में छबरा टीपीपी, बिहार में नाबीनगर थर्मल पावर प्रोजेक्ट इत्यादि शामिल हैं।
  • प्राइवेट क्षेत्र में प्रमुख विकासकों ने भी वित्तपोषण के लिए आरईसी से संपर्क किया है। प्राइवेट क्षेत्र में, आरईसी ने हिमाचल प्रदेश में करचम वांगटू एचईपी, महाराष्ट्र में सासन अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट, माहन सुपरथर्मल पावर प्रोजेक्ट और महेश्वर एचईपी, छत्तीसगढ़ में पथाडी टीपपी, महाराष्ट्र में वर्धा टीपीपी, गुजरात में अदानी थर्मल पावर प्रोजेक्ट, सिक्किम में तीस्ता चरण-IIIऔर IV एचईपी के लिए ऋण स्वीकृत किया है।
  • कुछ विकासकों ने आरईसी से कंसोर्टियम में अग्रणी वित्तपोषक के रूप में भूमिका निभाने के लिए संपर्क किया है। इस समय, आरईसी हिमाचल प्रदेश में 100 मेगावाट मलाना-II हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट, सिक्किम में 1200 मेगावाट तीस्ता चरण- III हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट, महाराष्ट्र में वर्धा पावर कंपनी प्रा.लि. का 270 मेगावाट फेस- I और 270 मेगावाट फेस-II कोयला आधारित थर्मल पावर प्रोजेक्ट, उत्तर प्रदेश में 1200 मेगावाट अनपरा -सी थर्मल पावर प्रोजेक्ट और आं प्रदेश में थर्मल पावर टेक कारपोरेशन (इंडिया)लि. का 1320 मेगावाट कोयला आधारित थर्मल पावर प्रोजेक्ट में अग्रणी वित्तपोषक के रूप में कार्य कर रहा है।

स्वीकृति के लिए लंबित विद्युत उत्पादन परियोजनांओ के ब्यौरे।

विद्युत उत्पादन - I

विद्युत उत्पादन - II

विद्युत उत्पादन परियोजनांओ के संवितरण के ब्यौरे।